साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3580
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
कानों में गूँज रहे वंशी के स्वर। पंछी का दल उड़ चला आकाश में। गाछ को लता बाँधे हुए पाश में।। छाया सा सिमट गया अनजाना डर। गलियों में चहल पहल राम राम है। ठंड से ठिठुरती ये सुबह शाम है।। ख़ुशियों से लबालब हैं आठों पहर।
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