साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3580
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
आम हुए हैं मधुॠतु के मुख़्तार! दूर तक लहराती फ़सलें! दुख की दिखती नहीं नस्लें! लाल गुलाबी टेसू के रुख़सार! गंध को उलीचता समीर! ताकते नयना हैं अधीर! सूर्य कर रहा किरणों का व्यापार!
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