साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3580
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
है अथाह जलराशि प्यासी है प्यास। ज्वार भाटा सौंदर्य है सागर का। दुःख सुनता कौन छूछी गागर का।। नखत हैं फिर भी सूना सा आकाश। चक्षु में आँसू- सीपी में मोती। दूर कहीं आज- पुरवाई रोती।। सपनों पर दुर्दिन- फेंकता है पाश।
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