नन्हे क़दमों से धरती पर, सपनों का विस्तार,
हँसी में झरते मोतियों-सा, निर्मल उसका प्यार।
मुट्ठी में सूरज बाँध चले, चाँद को करें इशारा,
बाल-मन का कौतुक देखो, जग लगे कितना प्यारा।
माँ की गोदी झूला बनती, पापा बनते घोड़ा,
तितली संग उड़ने की ज़िद, बादल से है जोड़ा।
मिट्टी में महल रचाता है, राजा बनकर हँसता,
उसके छोटे से संसार में, हर दुख पल सुख मोड़ा।
तोतली बोली में जैसे, सरगम गूँज उठे,
नन्ही उँगली थामे चलना, जीवन राग सधे।
आँखों में इंद्रधनुष सजा, सपनों का मेला,
हर पल रचता नई कहानी, मन का भोला रेला।
रूठे तो बादल बन जाए, हँसे तो धूप खिलाए,
नन्हे दिल की हर धड़कन, ममता गीत सुनाए।
बालपन की इस छाया में, प्रेम सुधा बरसती,
वात्सल्य की इस दुनिया में, हर पीड़ा भी हँसती।

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
