उठाया ही था पहला कौर
कि पगहा तुड़ा कर भैंस भागी कहीं और
पहुँचा ही था खेत में पानी
कि छप्पर में आग लगी बिटिया चिल्लानी
आरंभ ही किया था गीत का बोल
कि ढोलकिया के अनुसार फूट गया ढोल
घी का था बर्तन और गोबर की घानी
पानी जैसी चाय पी, चाय जैसा पानी
एक हाथ जोड़ा तो टूट गया डेढ़ हाथ
यही सारा जीवन-वृत्तांत रहा दीनानाथ!

साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
सहयोग कीजिएप्रबंधन 1I.T. एवं Ond TechSol द्वारा
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें
