साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3595
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
ग्राहक बना जमूरा है बाज़ार मदारी है! इच्छाएँ टँगी हुईं शो केस मे! अब रावण फिरें साधू के भेष मे! हर महीने सिर पर चढ़ती जाए उधारी है! मोल भाव करना भी एक आर्ट है! मकड़जाल हुआ ये मेगामार्ट है! माशा तोला जो होता है वो व्यापारी है!
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें