साहित्य रचना : साहित्य का समृद्ध कोष
संकलित रचनाएँ : 3595
कटनी, मध्य प्रदेश
1966
भट्टी की धधक रही आग हुआ मौसम! हवाएँ हैं, लपट है, लू है! गर्म तवे सी तपती भू है! ॠतुओं के दामन पे दाग हुआ मौसम! प्यासे हैं नदी और झरने! पेड़, पात, फूल लगे डरने! आग उगलता रवि घाघ हुआ मौसम! चंद्रपुर गर्म जम्मू ठंडा! कुआँ पहने तावीज गंडा! जिला, प्रदेश और संभाग हुआ मौसम!
अगली रचना
पिछली रचना
साहित्य और संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। आपके द्वारा दिया गया छोटा-सा सहयोग भी बड़े बदलाव ला सकता है।
रचनाएँ खोजने के लिए नीचे दी गई बॉक्स में हिन्दी में लिखें और "खोजें" बटन पर क्लिक करें